Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
"जात ले जात, टके सेर जात। एक टका दो, हम अभी अपनी जात बेचते हैं। टके के वास्ते...." अंधेर नगरी में जात बेचने वाले ब्राह्मण के इस संवाद का व्यंग्यार्थ है :
1
यहाँ नगण्य साधारण, विशिष्ट असाधारण सब एक ही भाव बिक रहे हैं।
2
यहाँ नगण्य साधारण विशिष्ट हो जाता है।
3
यहाँ सामंती मूल्य अक्षुण्ण रहते हैं।
4
राजतंत्र में मूल्य-व्यवस्थाएं अपरिवर्तनीय होती हैं।