"चीफ की दावत में उपेक्षिता और परिवार में कूड़ा-करकट की तरह छिपाई जाने वाली वृद्धा माँ का महत्व उजागर करके प्रतीकात्मक ढंग से परंपरा का महत्व दिखाया गया है।"
उपरोक्त कथन किस आलोचक का है ?
1
रामस्वरूप चतुर्वेदी
2
आ० रामचन्द्र शुक्ल
3
विश्वनाथ त्रिपाठी
4
हजारी प्रसाद द्विवेदी