'कामायनी' के 'लज्जा' सर्ग की पंक्तियाँ हैं :
A. प्राणी, कटुता को बाँट रहा जगती को करता अधिक दीन
B. वन, गुहा, कुंज, मरु- अंचल में हूँ खोज रहा अपना विकास
C. मैं एक पकड़ हूँ जो कहती ठहरो कुछ सोच-विचार करो ।
D. इस निविड़ निशा में संसृति की आलोकमयी रेखा क्या है ?
E. नारी! तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास-रजत-नग पगतल में,
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
1
केवल A, B और C
2
केवल B, C और D
3
केवल C, D और E
4
केवल A, C और D