"भीतर कदम तो रख दिया, पर सहसा सहम गई, जैसे वह किसी अंधेरे कुएँ में अपने-आप कूद पड़ी हो, ऐसा कुआँ जो निरंतर पतला होता गया है .... और जिसमें पानी की गहराई पाताल की पर्तों तक चली गई हो, जिसमें पड़कर वह नीचे धँसती चली जा रही हो ..... । "
यह कथन किस कहानी से लिया गया है.
1
कोसी का घटवार
2
राजा निरबंसिया
3
अपना-अपना भाग्य
4
परिंदे