''हमारे समाज में मानवीय गुणों की पहचान बढ़नेवाली है। कुल और जाति का अहंकार विदा हो रहा है। आगे, मनुष्य केवल उसी पद का अधिकारी होगा जो उसके अपने सामर्ध्य से सूचित होता है, उस पद का नहीं जो उसके माता-पिता या वंश की देन है।"

उपरोक्त कथन किस रचना की भूमिका से उद्धृत है ?

1
प्रिय - प्रवास
2
भारत - भारती
3
रश्मिरथी
4
कुरूक्षेत्र

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