“रचनाएँ स्वयं पाठकों से संवाद कर बहुत कुछ बताएँगी; और यह भी बताएँगी कि लेखक का ध्यान रचनाओं में दो ही बिंदुओं पर रहा है, एक तो विचार चिंतन और दूसरा लालित्य, जो कह सके, ललित निबंध ठहरी हुई विधा नहीं है।" - उपर्युक्त कथन किस निबंधकार का है?

1
हजारीप्रसाद द्विवेदी
2
विद्यानिवास मिश्र
3
विवेकी राय
4
कुबेरनाथ राय

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