"ज़िंदगी स्वयं एक महान घड़ी है। प्रातः -संध्या उसकी सुइयाँ हैं। नियम-बद्ध एक-दूसरी के पीछे घूमती रहती हैं। मैं चाहती हूँ - मेरा घर भी घड़ी ही की तरह चले। हम सब उसके पुर्जे बन जाएँ और नियम-पूर्वक अपना-अपना काम करते जाएँ।" - अंजो दीदी नाटक में यह संवाद किसने किससे कहा?

1
अंजली द्वारा मुन्नी को कहा गया।
2
अनिमा द्वारा अंजली को कहा गया।
3
अंजली द्वारा अनिमा को कहा गया।
4
अंजली द्वारा नीरज को कहा गया।

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