सिद्धों और नागपंथी योगियों के चिंतन का विवेचन करते हुए यह किसने कहा था कि उनकी रचनाओं का जीवन की स्वाभाविक सरणियों, अनुभूतियों और दशाओं से कोई संबंध नहीं था।
1
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
2
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
3
आचार्य नंददुलारे बाजपेयी
4
डॉ. रामविलास शर्मा