Teaching UGC NET Mock Test Series 2025 (Paper 1 & 2) हिन्दी साहित्य हिन्दी साहित्य का इतिहास आधुनिक काल
“मानव कब दानव से भी दुर्द्दन्त, पशु से भी बर्बर और पत्थर से भी कठोर, करुणा के लिए निरवकाश हृदय वाला हो जाएगा, नहीं जाना जा सकता। अतीत सुखों के लिए सोच क्यों, अनागत भविष्य के लिए भय क्यों और वर्तमान को मैं अपने अनुकूल बना ही लूंगा; फिर चिन्ता किस बात की?"
उपर्युक्त संवाद 'चंद्रगुप्त' नाटक में किस के द्वारा कहा गया है?
1
आंभीक
2
दाण्डायन
3
चन्द्रगुप्त
4
सिंहरण