‘राजनीति साहित्य नहीं है। उसमें एक-एक क्षण का महत्व है। कभी एक क्षण के लिए भी चूक जायें, तो बहुत बड़ा अनिष्ठ हो सकता है। '

- यह संवाद किस नाटक और किस चरित्र का है?

नाटक और चरित्र के सही युग्म का चयन कीजिए।

1
आषाढ़ का एक दिन - प्रियंगु
2
चन्द्रगुप्त - राक्षस
3
स्कंदगुप्त - बंधुवर्म्मा
4
महाभोज - दा साहब

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