"डिगति उर्वि अति गुर्वि, सर्ब पब्बै समुद्र-सर ।
ब्याल बधिर तेहि काल, बिकल दिगपाल चराचर ।।
दिग्गयंद लरखरत परत दसकंधु मुक्ख भर ।
सुर- बिमान हिमभानु, भानु संघटित परसपर ।।
चौके बिरंचि संकर सहित, कोलु कमठु अहि कलमल्यौ ।
ब्रह्मंड खंड कियो चंड धुनि, जबहिं राम सिवधनु दल्यौ ।”
किस छन्द में निबद्ध है ?
1
कुण्डलिया
2
छप्पय
3
कवित्त
4
मन्दाक्रान्ता