भट्ट तौत के अनुसार काव्य हेतु 'प्रतिभा' की व्याख्या है

1
प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता ।
2
प्रतिभा नवनवोल्लेखशालिनी प्रज्ञा ।
3
अपूर्व वस्तु निर्माण क्षमा प्रज्ञा ।
4
क्षणं स्वरूपस्पर्शोत्था प्रज्ञैव प्रतिभा कवेः ।

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