“तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।
झुके कूल सों जल परसन हित मनहुँ सुहाए।।”
इसके रचयिता हैं -
1
भारतेंदु हरिश्चंद्र
2
सुमित्रानंदन पंत
3
जयशंकर प्रसाद
4
मैथिलीशरण गुप्त
“तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।
झुके कूल सों जल परसन हित मनहुँ सुहाए।।”
इसके रचयिता हैं -