'अंग्रेजराज सुख साज सजे सब भारी'
पै धन विदेश चलि जात यहै अतिख्वारी'
किसकी काव्य पंक्ति है?
1
प्रतापनारायण मिश्र
2
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
3
बद्रीनारायन चौधरी 'प्रेमघन'
4
ठाकुर जगमोहन सिंह
'अंग्रेजराज सुख साज सजे सब भारी'
पै धन विदेश चलि जात यहै अतिख्वारी'
किसकी काव्य पंक्ति है?