"वे भक्ति के मार्ग को ऐसा नहीं मानते जिसे 'लखे कोई बिरलै'। वे उसे ऐसा सीधा-सादा स्वाभाविक मार्ग बताते हैं जो सबके सामने दिखाई पड़ता है। वह संसार में सबके लिये ऐसा ही सुलभ है जैसे अन्न और जल।"

उपर्युक्त कथन रामचन्द्र शुक्ल ने किस रामभक्त कवि के संदर्भ में कहा है?

1
नाभादास 
2
अग्रदास 
3
तुलसीदास 
4
ईश्वरदास 

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