गगन हुता नहि महि हुती हुते चंद नही सुर।
ऐसे अंधकार महँ रचा मुहम्मद नूर।।
यह पंक्ति जायसी के किस काव्य-कृति से हैं?

1
पद्मावत  
2
अखरावट
3
आखिरी कलाम 
4
कान्हावत

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