"जय जय भैरव असुर-भयाउनि, पसुपति-भामिनि माया।
सहज सुमति बर दिअहे गोसाउनि अनुगति गति तुअ पाया॥"
उपर्युक्त पद किसका है?
1
कबीर
2
हेमचन्द्र
3
विद्यापति
4
तुलसीदास
"जय जय भैरव असुर-भयाउनि, पसुपति-भामिनि माया।
सहज सुमति बर दिअहे गोसाउनि अनुगति गति तुअ पाया॥"
उपर्युक्त पद किसका है?